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धारा 8 कंपनी के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया में देखें, हम कहाँ खड़े हैं

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हमारे बारे में

सूर्योदय के समय शांत पानी पर ठहरी नावें
प्रतीकात्मक चित्र

हमारी कहानी

आनंदबोध एक सीधा-सा सवाल पूछता है: हमें कभी ख़ुश रहना क्यों नहीं सिखाया जाता? इसका जवाब इसके नाम में ही है। आनंद यानी ख़ुशी और बोध यानी जागरूकता। ख़ुशी हमारी सहज अवस्था है, और जागरूकता उसे सामने लाती है।

आनंदबोध फ़ाउंडेशन यह जवाब उन लोगों तक ले जाता है जिनकी ख़ुशी अभाव, पीड़ा, चिंता और अकेलेपन के नीचे दबी है — उनका धर्म, जाति या पंथ जो भी हो। यह शुरुआत उसे हटाने से करता है जो ख़ुशी को छिपाता है। स्वास्थ्य सबसे पहले आता है, क्योंकि बीमारी अक्सर परिवारों को ग़रीबी में धकेलती है और अच्छा स्वास्थ्य उन्हें बाहर निकालता है।

इस काम का पैसा HeartsWill से आता है: रोज़ की ऐसी ख़रीदारी जो किसी ज़रूरतमंद तक कुछ सच्चा पहुँचाती है।

"आनंदबोध" नाम क्यों

आनंद यानी ख़ुशी। बोध यानी जागरूकता — सच्ची समझ का क्षण। दोनों मिलकर कहते हैं कि जागरूकता ख़ुशी को सामने लाती है, और ख़ुशी पर हर इंसान का अधिकार है। हम आनंदबोध को हमेशा एक शब्द में लिखते हैं।

लोग

  • Nikhil Sharma

    संस्थापक

    Nikhil ने आनंदबोध की स्थापना की है और पंजीकरण के बाद आनंदबोध फ़ाउंडेशन के बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे। वे 2008 से Fabulous Media का नेतृत्व कर रहे हैं।

  • Neha Sharma

    सह-संस्थापक

    Neha आनंदबोध फ़ाउंडेशन की सह-संस्थापक हैं।

  • गुरु आनंद

    आनंदबोध की आवाज़

    गुरु आनंद आनंदबोध ब्रांड की आवाज़ और दूत हैं। वे चार्टर का संदेश लोगों तक ले जाते हैं। आनंदबोध फ़ाउंडेशन में उनका कोई पद नहीं है।

  • Alinkrita Sharma

    करुणा अभियान की अगुवाई

    Alinkrita आनंदबोध फ़ाउंडेशन के पहले अभियान, करुणा, की अगुवाई करती हैं।

बोर्ड

गठन हो रहा है। नियुक्ति के बाद निदेशकों के नाम यहाँ दिए जाएँगे, साथ ही उन्हें सलाह देने वाली हैप्पीनेस काउंसिल के भी।

सर्वे भवन्तु सुखिनः

सब सुखी हों।