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धारा 8 कंपनी के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया में देखें, हम कहाँ खड़े हैं

AnandBodh FoundationAnandBodh Foundation

हमारा चार्टर

आनंदबोध फ़ाउंडेशन का संस्थापक दस्तावेज़। इसमें लिखा है कि हम क्या मानते हैं, किसकी सेवा करते हैं और ख़ुद को कैसे जवाबदेह रखेंगे।

आनंदबोध फ़ाउंडेशन के पंजीकरण के साथ यह चार्टर अपनाया जाएगा। यहाँ अनुच्छेद 7 का सार दिया गया है; उसका पूरा प्रारूप कानूनी समीक्षा की प्रतीक्षा में है।यह हिन्दी अनुवाद है। किसी अंतर की स्थिति में अंग्रेज़ी पाठ मान्य होगा।

आदर्श वाक्य

सर्वे भवन्तु सुखिनः

सब सुखी हों।

प्रस्तावना

हम, आनंदबोध फ़ाउंडेशन के संस्थापक, मानते हैं कि ख़ुशी भाग्यशाली लोगों का पुरस्कार नहीं है। यह हर इंसान का जन्मसिद्ध अधिकार है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 में जीवन के अधिकार को गरिमा के साथ जीने का अधिकार माना है — जिसकी बुनियादी ज़रूरतें पोषण, कपड़े और आश्रय हैं। संयुक्त राष्ट्र 20 मार्च को अंतरराष्ट्रीय ख़ुशी दिवस के रूप में मनाता है। हम इसी मान्यता को रोज़ के व्यवहार में बदलने के लिए हैं — एक-एक हार्ट के साथ।

अनुच्छेद 1

नाम और स्वरूप

संस्था का नाम आनंदबोध फ़ाउंडेशन (AnandBodh Foundation) होगा। यह एक ग़ैर-लाभकारी कंपनी है। इसकी आय और संपत्ति केवल इसके उद्देश्यों पर लगाई जाएगी। इनका कोई भी हिस्सा किसी सदस्य, निदेशक या संबंधित व्यक्ति को लाभांश, मुनाफ़े या लाभ के रूप में नहीं दिया जाएगा।

अनुच्छेद 2

दृष्टि

एक ऐसा भारत जिसमें हर व्यक्ति — उसके साधन जो भी हों — गरिमा, स्वास्थ्य, शांति, अपनेपन और सार्थकता के साथ जिए।

अनुच्छेद 3

ध्येय

ख़ुशी को वहाँ तक पहुँचाना जहाँ उसकी कमी है: अभाव में जी रहे लोगों तक ज़रूरी चीज़ें, पीड़ा में जी रहे लोगों तक देखभाल, बेचैनी में जी रहे लोगों तक शांति, अकेले लोगों तक साथ और सबके लिए उद्देश्य — HeartsWill.com के ज़रिए अनेक दिलों के योगदान से।

अनुच्छेद 4

ख़ुशी के पाँच अधिकार

  1. ज़रूरी चीज़ों का अधिकार — भोजन, कपड़े, गर्माहट, स्वच्छता और सुरक्षित आश्रय की ओर सहारा।

  2. स्वास्थ्य का अधिकार — चिकित्सा राहत, पोषण और योग के ज़रिए शरीर की देखभाल।

  3. मन की शांति का अधिकार — शांति, भावनात्मक सहारे और योग्य परामर्श तक पहुँच।

  4. अपनेपन का अधिकार — कोई अकेला न छूटे; साथ, समुदाय और समावेश।

  5. सार्थक जीवन का अधिकार — शिक्षा, सम्मानजनक आजीविका और समाज को कुछ लौटाने का अवसर।

अनुच्छेद 5

सार्वभौमिकता

धर्म, जाति, पंथ, लिंग, भाषा, क्षेत्र, विकलांगता, धन, शिक्षा या सामाजिक स्थिति का भेद किए बिना फ़ाउंडेशन हर ज़रूरतमंद व्यक्ति की सेवा करेगा। लाभार्थियों का चयन केवल ज़रूरत के आधार पर होगा। कोई भी लाभ किसी एक धार्मिक समुदाय या जाति के लिए आरक्षित नहीं होगा।

अनुच्छेद 6

मूल्य

गरिमा पहले
— हम लोगों की सेवा करते हैं, तस्वीरों की नहीं।
सार्वभौमिकता
— देने वाला और पाने वाला बराबर हैं।
पारदर्शिता
— हर हार्ट देने वाले से लेकर पहुँचने तक दर्ज रहता है।
सक्षम करुणा
— नेक इरादे, योग्य हाथों से पूरे हों।
आनंद
— सेवा उत्सव जैसी लगे, दया जैसी नहीं।

अनुच्छेद 7

उद्देश्य (सार)

ग़रीबों की सहायता · चिकित्सा राहत · योग · शिक्षा · बुज़ुर्गों, अकेले लोगों, विकलांगजनों और संकट में पड़े लोगों की देखभाल। पूरा प्रारूप कानूनी समीक्षा की प्रतीक्षा में है।

अनुच्छेद 8

तटस्थता

ग़ैर-सांप्रदायिक योग और ध्यान-साधना को छोड़कर, फ़ाउंडेशन न कोई धार्मिक अनुष्ठान करेगा, न किसी धर्म का प्रचार करेगा और न धर्मांतरण का प्रयास करेगा। यह किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेगा।

अनुच्छेद 9

गरिमा का संकल्प

सूचित सहमति के बिना किसी भी प्राप्तकर्ता की तस्वीर, वीडियो, नाम या कहानी प्रकाशित नहीं की जाएगी। अभिभावक की लिखित सहमति के बिना बच्चों को पहचाने जा सकने वाले रूप में नहीं दिखाया जाएगा, और कभी भी शर्मिंदा करने वाले ढंग से नहीं। जहाँ संभव हो, प्राप्तकर्ता ख़ुद चुनेंगे कि उन्हें क्या मिले।

अनुच्छेद 10

धरोहर की तरह संभाल

हर वर्ष की आय का कम से कम 85% उद्देश्यों पर लगाया जाएगा या औपचारिक रूप से उनके लिए संचित किया जाएगा। प्रशासनिक और कार्यक्रम ख़र्च हर वर्ष ऑडिट किए गए खातों के साथ प्रकाशित होंगे। किसी भी निदेशक को निदेशक होने के लिए भुगतान नहीं किया जाएगा। बाज़ार की शर्तों पर और हितों के टकराव वाले निदेशक के अलग रहने के सिवा, किसी संस्थापक, निदेशक, रिश्तेदार या उनके व्यवसाय के साथ कोई लेन-देन नहीं होगा।

अनुच्छेद 11

शासन

तीन से सात निदेशक; कम से कम एक-तिहाई स्वतंत्र और कम से कम एक महिला। स्वयंसेवकों, साझेदारों और समुदाय के सदस्यों की एक हैप्पीनेस काउंसिल (ख़ुशी परिषद) वर्ष में दो बार बोर्ड को सलाह देगी।

अनुच्छेद 12

संशोधन

सदस्यों के विशेष प्रस्ताव और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना उद्देश्यों में बदलाव नहीं किया जाएगा।

सर्वे भवन्तु सुखिनः

सब सुखी हों।